
मौनी अमावस्या : जलाशयों में उमड़ी आस्था
मौनी अमावस्या के तहत रविवार को जलाशयों में आस्थावानों की खासी भीड़ रही। गंगा, यमुना व अन्य पवित्र नदियों में श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान-पुण्य किया। वहीं प्रयागराज और हरिद्वार में स्नान करने वालों का रैला उमड़ा।

हमार दुनिया
मौनी अमावस्या को लेकर कानपुर के बिठूर घाट, भैरौं घाट में भीड़ देखी गई। जबकि प्रयागराज में महाकुंभ के बाद यह पहला मौका था जब संगम में इतनी भीड़ देखी गई। रविवार को अन्य अखाड़ों के साथ किन्नर अखाड़े ने भी स्नान किया। महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में सैकड़ों की संख्या में किन्नर संत गंगा स्नान करने के लिए संगम पहुंचे। किन्नर संत हाथों में त्रिशूल व डमरू व शरीर पर भगवा वस्त्र धारण कर जय श्रीराम का उद्घोष करते हुए किन्नर संतों ने स्नान किया। गोरखपुर की महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरि ने शंखनाद किया। इस मौके पर किन्नर अखाड़ा के संरक्षक दुर्गादास महराज, यूपी की अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी कल्याणी नंद गिरी अध्यक्ष, सचिव, झारखंड की प्रदेश अध्यक्ष महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरि, अमरजीत, पंजाब की अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी वामदेव, उडीसा की अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी मीरा नंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी देवांशी नंद गिरि सचिव, गुजरात की अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी गिरनारी नंद गिरि अध्यक्ष, सहित किन्नर अखाडा के बडी संख्या मे संत, शिष्य शामिल रहे। इधर गंगातट पर प्रवास कर रहे संतों ने अल सुबह गंगा स्नान किया। संतों ने बताया कि माघ मास में तीर्थराज प्रयागराज में गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
हर की पैड़ी में उमड़े श्रद्धालु
उत्तराखंड के हरिद्धार में रविवार को मौनी अमावस्या पर हर की पैड़ी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों की आस्था मौसम पर भारी पड़ती नजर आई। प्रातःकाल से ही गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन बना रहा। पुलिस बल द्वारा श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से गंगा स्नान कराया गया तथा उन्हें सकुशल उनके गंतव्य स्थान की ओर रवाना किया गया।
मौनी अमावस्या का महत्व
हिंदू शास्त्रों के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। माघ महीने की अमावस्या को विशेष रूप से शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितरों के लिए किए गए कर्मकांड से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही ध्यान, जप और तप से आत्मिक शक्ति और मानसिक शांति मिलती है।

हमार दुनिया
हमार दुनिया के और लेख →



